प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा संस्कृत सुभाषितम्: उत्तम चरित्र ही प्रभावी नेतृत्व और विश्वास का आधार
लखनऊ:
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जिसमें उत्तम चरित्र के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया गया है कि एक नेक और शीलवान व्यक्ति किस प्रकार समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा अर्जित करता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर यह सुभाषितम् साझा करते हुए लिखा:
"शीलवान् पूजितो लोके शीलवान् साधुसम्मतः।
शीलवान् सर्वकर्मार्हः शीलवान् प्रियदर्शनः॥"
उत्तम चरित्र से मिलती है प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता
इस सुभाषित का अर्थ और महत्व बताते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से यह संदेश दिया गया है कि उत्तम चरित्र से युक्त व्यक्ति समाज में सज्जनों का आदर और विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। सत्यनिष्ठा, विनम्रता और मर्यादित आचरण ही वह खूबी है जिसके कारण ऐसे व्यक्ति को हर बड़ी जिम्मेदारी के योग्य समझा जाता है।
नेतृत्व और सफलता का मूलमंत्र
सम्मान और आदर: शीलवान व्यक्ति का व्यक्तित्व समाज में सभी के लिए प्रशंसनीय, प्रेरणादायक और अनुकरणीय होता है।
प्रभावी नेतृत्व: जीवन में सफलता, प्रभावी नेतृत्व और अटूट विश्वास का वास्तविक आधार केवल और केवल उत्तम चरित्र ही है।
यह प्रेरक संदेश न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन में भी उच्च नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
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