'मनरेगा' का दौर खत्म! 1 जुलाई से देश के गाँवों में लागू होने जा रहा है सबसे बड़ा सीक्रेट प्लान!
नई दिल्ली, 29 जून 2026 ब्यूरो रिपोर्ट, पीआईबी दिल्ली
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस धूल-मिट्टी, चौपाल और कच्चे रास्तों को हम सिर्फ 'गाँव' कहकर छोड़ देते हैं, वही गाँव अचानक एक ऐसा रूप ले लें जो अमेरिका या यूरोप के विकसित कस्बों को टक्कर देने लगे? जब देश का हर तीसरा नागरिक रोजगार के लिए शहरों की तरफ भागना बंद कर दे और गाँव खुद प्रगति का पावरहाउस बन जाए, तो कैसा लगेगा?
भारत के ग्रामीण इतिहास में एक ऐसा भूचाल आने वाला है, जिसकी शुरुआत आज से ठीक 48 घंटे बाद होने जा रही है। एक ऐसा फैसला, जो देश के करोड़ों ग्रामीणों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदलने का दम रखता है।
पूसा परिसर से आई चौंकाने वाली खबर: राजनीति की दीवारें ढहीं!
नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन “ग्रामोदय से राष्ट्रोदय” का दूसरा दिन एक ऐसे सस्पेंस के टूटने का गवाह बना, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। पहली बार, देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री (जिसमें धुर विरोधी राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल थे) राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एक ही टेबल पर आ बैठे।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मंच से दहाड़ते हुए कहा— "गाँव केवल धूल-मिट्टी या चौपाल का नाम नहीं, ये भारत की चेतना और आत्मा हैं। अगर देश को विकसित बनाना है, तो रास्ता गाँवों से होकर ही गुजरेगा।"
🔍 'मनरेगा' का अंत और 95,000 करोड़ का सस्पेंस: 1 जुलाई से क्या होने वाला है?
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी और संवेदनशील इनसाइड स्टोरी यह है कि ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाने वाली 'मनरेगा' अब बीते दिनों की बात होने जा रही है।
'विकसित भारत- जी राम जी' (VB-G RAM G) योजना: आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में एक नई और महा-महत्वाकांक्षी योजना लागू होने जा रही है, जो मनरेगा की जगह लेगी।
तिजोरी का मुंह खुला: इस योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए सरकार ने ₹95,682 करोड़ की अंतरिम स्वीकृति देकर राज्यों को चौंका दिया है।
AI और ड्रोन का कड़ा पहरा: अब गाँवों के विकास में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं होगी। केंद्रीय मंत्री ने साफ कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए हर एक पैसे की लाइव ट्रैकिंग होगी।
तात पलट: 3 करोड़ नहीं, अब 6 करोड़ महिलाओं का 'महा-मिशन'!
इस नीति का सबसे संवेदनशील और भावुक कर देने वाला पहलू देश की ग्रामीण महिलाओं से जुड़ा है। मंच से ‘लखपति दीदी डैशबोर्ड’ और ‘SHE LEAPS’ डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया।
बड़ा ऐलान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने लक्ष्य को दोगुना कर दिया है। अब देश की 3 करोड़ नहीं, बल्कि 6 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाया जाएगा। इसके लिए अगले 5 वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का बैंक लिंकिंग रोडमैप तैयार किया गया है, जो ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गुलामी से हमेशा के लिए आजाद कर देगा।
अधिकारियों को अल्टीमेटम और कम बारिश का 'हाई अलर्ट'!
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों को कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि वे ग्रामीण विकास से जुड़े खाली पदों को तुरंत भरें और अधिकारियों का बार-बार ट्रांसफर करना बंद करें। किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को कम से कम 2 से 3 साल एक ही जगह टिकाया जाए ताकि काम की रफ्तार न थमे।
इसके साथ ही, एक बड़ा सस्पेंस मानसून के खतरे को लेकर भी सामने आया। संभावित कम बारिश को देखते हुए 14 राज्यों को हाई अलर्ट पर रहने के लिए कहा गया है, ताकि जलसंकट की स्थिति में ग्रामीणों को अतिरिक्त रोजगार देकर भुखमरी से बचाया जा सके।
सहभागिता की नई सुबह
"हर पात्र को आवास मिलेगा, कोई भी भूमिहीन बिना जमीन के नहीं रहेगा।" इस भरोसे के साथ केंद्र ने गेंद अब राज्यों के पाले में डाल दी है। देखना यह होगा कि 1 जुलाई की सुबह देश के गाँवों में विकास का कौन सा नया सवेरा लेकर आती है।