तारा कोयला ब्लॉक नीलामी विवाद: सरकार ने स्पष्ट की स्थिति, छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति के बाद हुई पूरी प्रक्रिया पारदर्शी
नई दिल्ली:
हाल ही में मीडिया में तारा (संशोधित) कोयला ब्लॉक की नीलामी को लेकर सामने आई रिपोर्टों को सरकार ने भ्रामक और अधूरा करार दिया है। आधिकारिक तथ्यों के अनुसार, इस ब्लॉक की नीलामी 2023 के बाद हुए महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक अनुरोध के बाद पूरी तरह पारदर्शी तरीके से वर्ष 2026 में संपन्न हुई है।
क्या है पूरा मामला और घटनाक्रम?
साल 2023 में हटाया गया था ब्लॉक: सातवें चरण की नीलामी के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार से मिले एक पत्र के आधार पर, जिसमें हसदेव अरण्ड इलाके के कोयला ब्लॉकों को वाणिज्यिक नीलामी से बाहर रखने का आग्रह किया गया था, तारा कोयला ब्लॉक को हटा दिया गया था। लेमरू हाथी कॉरिडोर के दायरे में आने वाले इन ब्लॉकों को इसके बाद के चरणों में शामिल नहीं किया गया था।
छत्तीसगढ़ सरकार का नया पत्र (दिसंबर 2025): दिनांक 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार से एक नया पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें स्पष्ट किया गया कि तारा कोयला ब्लॉक 'लेमरू हाथी कॉरिडोर' के बाहर स्थित है और इसे नीलामी के अगले दौर में शामिल किया जा सकता है।
सीमा में संशोधन और सफल नीलामी: राज्य सरकार के इस पत्र और सीएमपीडीआईएल (CMPDIL) द्वारा ब्लॉक की सीमा में संशोधन के बाद, लेमरू हाथी कॉरिडोर से प्रभावित क्षेत्र को हटाकर इसे वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 15वें दौर में रखा गया, जहां इसकी सफल नीलामी की गई।
बाजार की भारी दिलचस्पी और राज्य को आर्थिक लाभ
तारा (संशोधित) कोयला ब्लॉक की नीलामी में बाजार ने जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है। इस ब्लॉक के लिए कुल 9 बोलियां प्राप्त हुईं और अंततः 37.50% की उच्च राजस्व हिस्सेदारी (Revenue Share) पर इसका आवंटन किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ब्लॉक के शुरू होने से छत्तीसगढ़ राज्य को हर साल 1200 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा, इसके साथ ही क्षेत्र में 8,000 से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
सरकार ने साफ किया है कि मीडिया की कुछ रिपोर्टों में 2023 के बाद के घटनाक्रमों और राज्य सरकार के ताजा प्रशासनिक पत्रों को नजरअंदाज किया गया है, जबकि पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार की सहमति और पारदर्शी नियमों के तहत ही पूरी की गई है।