18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत-यूएई संबंधों को नई धार: पीएम मोदी और आबू धाबी के क्राउन प्रिंस की उच्च स्तरीय बैठक
एसजेएम 24 न्यूज़ डेस्क:
नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूती मिली है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को आबू धाबी के क्राउन प्रिंस महामहिम शेख खालिद बिन मोहम्मद के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी और द्विपक्षीय संबंधों पर जोर
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, वाणिज्यिक और ऊर्जा क्षेत्र में जारी सहयोग की सराहना की। नेताओं ने जनवरी 2026 में यूएई के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा और मई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा को याद करते हुए उच्च-स्तरीय नेतृत्व संपर्कों की निरंतरता को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में यूएई की सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी की सराहना की। दोनों नेताओं ने ब्रिक्स के मंच से साझा प्राथमिकताओं और वैश्विक हितों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
ओडिशा में $11.5 अरब डॉलर का ऐतिहासिक निवेश
इस बैठक का सबसे अहम पहलू दोनों देशों के बीच व्यापारिक और औद्योगिक निवेश रहा। यूएई की 'इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी' (IHC) ने भारत के ओडिशा राज्य में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 96,000 करोड़ रुपये) के निवेश से एक एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमिनियम परियोजना विकसित करने की घोषणा की है।
ऐतिहासिक निवेश: यह भारत के एल्युमिनियम क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा एकीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) है।
वैश्विक हब बनेगा ओडिशा: इस मेगा प्रोजेक्ट से ओडिशा को वैश्विक एल्युमिनियम विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) केंद्र के रूप में स्थापित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा
बैठक में यूएई के नवीनतम संप्रभु निवेश कोष 'ल'इमाद' (L'Imad) की भूमिका पर भी चर्चा हुई, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक होगा।
इसके अलावा, दोनों नेताओं ने निम्नलिखित उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को तेजी से बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया:
यह उच्च-स्तरीय बैठक भारत और यूएई के बीच स्थायी और दूरगामी रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।