धरोहर पर 'गुप्त' वार का सस्पेंस: हजरतगंज से आंबेडकर महासभा तक भारी बवाल, पोस्टर थामे सड़कों पर उतरे हजारों कार्यकर्ता!
लखनऊ, 30 जून 2026 राजधानी लखनऊ का सबसे वीवीआईपी इलाका—हजरतगंज और 10 विधानसभा मार्ग—आज अचानक छावनी में तब्दील हो गया। हवा में तैरती एक 'अपुष्ट' लेकिन बेहद संवेदनशील खबर ने ऐसा बारूद बोया कि रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI-आठवले) के हजारों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। मामला सीधे दलित चेतना के सबसे बड़े प्रतीक डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा और उनके पवित्र 'अस्थि कलश' से जुड़ा है।
अंबेडकर महासभा परिसर से बाबा साहेब की प्रतिमा और अस्थि कलश को गुपचुप तरीके से हटाने की खबरों ने यूपी की राजनीति में एक ऐसा खौफनाक सस्पेंस पैदा कर दिया है, जिसकी आंच सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुंच रही है।
हजरतगंज पर 'महा-ब्लॉक': पुलिस की दीवार और आरपीआई का चक्रव्यूह
जैसे ही खबर फैली कि बाबा साहेब की धरोहर के साथ कोई 'बड़ा खेल' होने वाला है, आरपीआई (आठवले) के प्रदेश अध्यक्ष पवन कुमार गुप्ता की अगुवाई में एक विशाल शांति मार्च निकाला गया। मार्च जैसे ही ऐतिहासिक हजरतगंज चौराहे पर पहुंचा, पहले से मुस्तैद भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को घेर लिया।
चौराहे पर हाई-वोल्टेज ड्रामा: पुलिस ने आंबेडकर महासभा की तरफ बढ़ रहे आरपीआई कार्यकर्ताओं के आगे लोहे की दीवार खड़ी कर दी।
नारेबाजी से गूंजी राजधानी: रोके जाने से भड़के कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज को चारों तरफ से घेरकर जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। 'धरोहर से छेड़छाड़ नहीं सहेंगे' के नारों से पूरा विधानसभा मार्ग दहल उठा।
पोस्टर पर लिखा था आक्रोश: "अस्थि कलश वहीं रहेगा!"
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के हाथों में जो पोस्टर्स थे, वे इस बात की गवाही दे रहे थे कि गुस्सा किस कदर चरम पर है। पोस्टर्स पर साफ अक्षरों में चेतावनी लिखी थी—"बाबा साहेब का अस्थि कलश वहीं रहेगा, धरोहर से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" > असली सस्पेंस: आखिर वे कौन लोग हैं जो बंद कमरों में बाबा साहेब के अस्थि कलश और उनकी प्रतिमा को वहां से विस्थापित करने की साजिश रच रहे हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा प्रशासनिक फेरबदल है या फिर कोई गहरा राजनीतिक एजेंडा? इस पर से पर्दा उठना अभी बाकी है।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन: क्या टल गया है तूफान?
सड़कों पर बढ़ते आक्रोश और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने के खतरे को देखते हुए प्रशासन के आला अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। काफी जद्दोजहद और मान-मनौव्वल के बाद, आरपीआई नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक कड़ा ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा।
ज्ञापन सौंपने और सख्त चेतावनी देने के बाद ही पुलिस आरपीआई कार्यकर्ताओं को हजरतगंज से वापस भेजने में कामयाब हो सकी।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा और अस्थि कलश सिर्फ एक ढांचा या धरोहर नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की आस्था और अस्मिता का केंद्र हैं। लखनऊ के दिल (हजरतगंज) में हुआ यह प्रदर्शन तो महज एक ट्रेलर है। अगर इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार या प्रशासन की तरफ से स्थिति तुरंत साफ नहीं की गई, तो यह चिंगारी पूरे उत्तर प्रदेश को अपनी चपेट में ले सकती है। पर्दे के पीछे कौन सी बिसात बिछाई जा रही है? सस्पेंस गहरा और बेहद खतरनाक है!