BREAKING NEWS
🔴 उत्तराखंड की देशी 'बद्री' नस्ल के संरक्षण में ऐतिहासिक उपलब्धि: ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म    |    🔴 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: वैश्विक शासन में सुधार के लिए दिया 'ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप' का 10 सूत्रीय प्रस्ताव    |    🔴 ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान ने राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मु से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय शांति पर हुई विस्तृत चर्चा    |    🔴 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत-यूएई संबंधों को नई धार: पीएम मोदी और आबू धाबी के क्राउन प्रिंस की उच्च स्तरीय बैठक    |    🔴 विशाखापत्तनम में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव टेबल टॉप एक्सरसाइज संपन्न: गैर-कानूनी समुद्री गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए एकजुट हुए सदस्य देश    |    🔴 उत्तराखंड की प्रसिद्ध देसी नस्ल 'बद्री गाय' के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।    |    🔴 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली के बीच द्विपक्षीय बैठक, ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर जोर    |    🔴 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की द्विपक्षीय बैठक, कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति    |    🔴 हरित तनों से हरित उद्यमों तक: बांस बन रहा ग्रामीण आजीविका, नवाचार और नए अवसरों का सशक्त माध्यम    |    🔴 तारा कोयला ब्लॉक नीलामी विवाद: सरकार ने स्पष्ट की स्थिति, छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति के बाद हुई पूरी प्रक्रिया पारदर्शी    |   
LIVE
Advertisement Space

सूर्य का 100 साल पुराना 'गुप्त बहीखाता': AI ने खोला कोडाइकनाल वेधशाला के कागजों में छिपा वो राज, जो पृथ्वी को बचाएगा बड़े आसमानी खतरे से!

मुख्य घटना: भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन कार्यरत आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (ARIES) के वैज्ञानिकों ने AI की मदद से कोडाइकनाल सौर वेधशाला के 100 साल पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स का डिजिटल विश्लेषण किया है।

01-07-2026 12:09:11 2 Views
सूर्य का 100 साल पुराना 'गुप्त बहीखाता': AI ने खोला कोडाइकनाल वेधशाला के कागजों में छिपा वो राज, जो पृथ्वी को बचाएगा बड़े आसमानी खतरे से!

विशेष विज्ञान ब्यूरो: 1 जुलाई 2026 की शाम विज्ञान और खगोल भौतिकी (Astrophysics) की दुनिया से एक ऐसी सनसनीखेज और संवेदनशील खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन कार्यरत आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (ARIES) के वैज्ञानिक दिब्य कीर्ति मिश्रा के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल करके सूर्य के एक ऐसे 'अदृश्य सच' को उजागर किया है, जो पिछले 100 सालों से कागज के पन्नों पर धूल फाँक रहा था।

वैज्ञानिकों ने आधुनिक मशीन लर्निंग की मदद से कोडाइकनाल सौर वेधशाला (KoSO) में रखे वर्ष 1916 से 2007 तक के हाथ से बनाए गए सौर रिकॉर्ड्स का पोस्टमार्टम किया है। ऊपरी तौर पर यह महज़ एक अकादमिक रिसर्च लग सकती है, लेकिन इसके पीछे छिपा सस्पेंस सीधे हमारी पृथ्वी की सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के अस्तित्व से जुड़ा है!

 'तितली आरेख' का रहस्य: क्यों इतिहास के पन्नों को खंगाल रहा है AI?

सौ सालों से भी अधिक समय से दुनिया भर के वैज्ञानिक सूर्य के उस खतरनाक और रहस्यमयी चुंबकीय चक्र को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जो रह-रहकर सौर लपटें, विनाशकारी ज्वालाएं और कॉरोनल मास इजेक्शन (CME) पैदा करता है।

  • आसमान से मंडराता खतरा: सूर्य से उठने वाले ये चुंबकीय तूफान अगर पृथ्वी से टकरा जाएं, तो अंतरिक्ष में तैर रहे हमारे उपग्रह (Satellites), ग्लोबल नैविगेशन सिस्टम और जमीन पर पूरी बिजली आपूर्ति (Power Grids) को पल भर में ठप कर सकते हैं।

  • सस्पेंस की वजह: आधुनिक सैटेलाइट्स से पहले का सौर इतिहास वैज्ञानिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली था। अलग-अलग चित्रकारों की शैली, कागज की ढलती उम्र और स्कैनिंग की खराब क्वालिटी के कारण 100 साल पुराना डेटा पूरी तरह अव्यवस्थित था। लेकिन इस रिसर्च में यू-नेट (U-Net) नामक सुपर-एडवांस्ड एआई मॉडल ने वो कर दिखाया जो इंसान कभी नहीं कर सकते थे।

 'U-Net' का डिजिटल जाल: एआई ने कैसे पकड़े सूर्य के 'फिंगरप्रिंट्स'?

एस्ट्रोफिजिकल जर्नल (The Astrophysical Journal) में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, एआई मॉडल ने दो बेहद संवेदनशील और जासूसी चरणों में काम किया:

  1. सूर्य की डिस्क की स्वचालित खोज: एआई ने सबसे पहले हर धुंधले और पुराने चित्र में सूर्य की डिस्क को खोजा, उसके केंद्र, सटीक आकार और झुकाव को मापा ताकि कोई भी जानकारी गलत जगह दर्ज न हो।

  2. प्लेजेस (Plages) की घेराबंदी: इसके बाद एआई ने 9 सौर चक्रों के इतिहास में जाकर 'प्लेजेस' (सूर्य पर मौजूद चुंबकीय रूप से सक्रिय चमकीले क्षेत्र) की पहचान की। ये प्लेज दरअसल सूर्य के चुंबकत्व का असली "फिंगरप्रिंट" हैं।

इस एआई जासूसी के बाद वैज्ञानिकों के हाथ लगा सूर्य की सक्रियता का एक अद्भुत 'तितली आरेख' (Butterfly Diagram), जिसने 1916 से 2007 के बीच अक्षांश और सौर-चक्र के चरणों के साथ बदलते सूर्य के आक्रामक व्यवहार को पूरी तरह डिकोड कर दिया।

 तिरुवनंतपुरम से अमेरिका तक फैला कूटनीतिक विज्ञान का जाल

इस महा-रिसर्च को अंजाम देने के लिए भारत और अमेरिका के शीर्ष संस्थानों ने हाथ मिलाया था। इसमें तिरुवनंतपुरम स्थित भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, अमेरिका (बोल्डर) का दक्षिणपश्चिम अनुसंधान संस्थान और बेंगलुरु का भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) शामिल थे।

डेटा का 'जादुई' मिलान:

जब एआई द्वारा हाथ से बने चित्रों से निकाले गए डेटा का मिलान कोडाइकनाल के अत्याधुनिक Ca II K पूर्ण-डिस्क प्रेक्षणों से किया गया, तो दोनों के नतीजे बिल्कुल सटीक बैठे। इसका मतलब यह है कि अब वैज्ञानिक अतीत के डेटा के खाली अंतरालों (Gaps) को भरकर भविष्य में आने वाले विनाशकारी सौर तूफानों की सटीक भविष्यवाणी कर सकेंगे।

 सौर महा-अध्ययन के मुख्य बिंदु
पैरामीटरविवरण / खोज
अध्ययन की अवधि1916 से 2007 (लगभग 9 सौर चक्र)
मुख्य तकनीकसुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग पद्धति (U-Net Architecture)
प्रमुख खोजप्लेज क्षेत्र का समय-अक्षांश "बटरफ्लाई" मानचित्र
वैश्विक सहयोगभारत (ARIES, IIA, IIST) एवं अमेरिका (Southwest Research Institute)
प्रकाशन सोर्सhttps://doi.org/10.3847/1538-4365/ae381e

SJM 24 News®

SJM 24 News

BREAKING NEWS 🔴 उत्तराखंड की देशी 'बद्री' नस्ल के संरक्षण में ऐतिहासिक उपलब्धि: ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म    |    🔴 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: वैश्विक शासन में सुधार के लिए दिया 'ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप' का 10 सूत्रीय प्रस्ताव    |    🔴 ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान ने राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मु से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय शांति पर हुई विस्तृत चर्चा    |    🔴 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत-यूएई संबंधों को नई धार: पीएम मोदी और आबू धाबी के क्राउन प्रिंस की उच्च स्तरीय बैठक    |    🔴 विशाखापत्तनम में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव टेबल टॉप एक्सरसाइज संपन्न: गैर-कानूनी समुद्री गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए एकजुट हुए सदस्य देश    |    🔴 उत्तराखंड की प्रसिद्ध देसी नस्ल 'बद्री गाय' के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।    |    🔴 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली के बीच द्विपक्षीय बैठक, ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर जोर    |    🔴 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की द्विपक्षीय बैठक, कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति    |    🔴 हरित तनों से हरित उद्यमों तक: बांस बन रहा ग्रामीण आजीविका, नवाचार और नए अवसरों का सशक्त माध्यम    |    🔴 तारा कोयला ब्लॉक नीलामी विवाद: सरकार ने स्पष्ट की स्थिति, छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति के बाद हुई पूरी प्रक्रिया पारदर्शी    |   

सूर्य का 100 साल पुराना 'गुप्त बहीखाता': AI ने खोला कोडाइकनाल वेधशाला के कागजों में छिपा वो राज, जो पृथ्वी को बचाएगा बड़े आसमानी खतरे से!

मुख्य घटना: भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन कार्यरत आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (ARIES) के वैज्ञानिकों ने AI की मदद से कोडाइकनाल सौर वेधशाला के 100 साल पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स का डिजिटल विश्लेषण किया है।

01-07-2026 2 Views
शेयर करें
सूर्य का 100 साल पुराना 'गुप्त बहीखाता': AI ने खोला कोडाइकनाल वेधशाला के कागजों में छिपा वो राज, जो पृथ्वी को बचाएगा बड़े आसमानी खतरे से!

विशेष विज्ञान ब्यूरो: 1 जुलाई 2026 की शाम विज्ञान और खगोल भौतिकी (Astrophysics) की दुनिया से एक ऐसी सनसनीखेज और संवेदनशील खबर सामने आई है, जिसने वैश्विक वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन कार्यरत आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (ARIES) के वैज्ञानिक दिब्य कीर्ति मिश्रा के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल करके सूर्य के एक ऐसे 'अदृश्य सच' को उजागर किया है, जो पिछले 100 सालों से कागज के पन्नों पर धूल फाँक रहा था।

वैज्ञानिकों ने आधुनिक मशीन लर्निंग की मदद से कोडाइकनाल सौर वेधशाला (KoSO) में रखे वर्ष 1916 से 2007 तक के हाथ से बनाए गए सौर रिकॉर्ड्स का पोस्टमार्टम किया है। ऊपरी तौर पर यह महज़ एक अकादमिक रिसर्च लग सकती है, लेकिन इसके पीछे छिपा सस्पेंस सीधे हमारी पृथ्वी की सुरक्षा और आधुनिक तकनीक के अस्तित्व से जुड़ा है!

 'तितली आरेख' का रहस्य: क्यों इतिहास के पन्नों को खंगाल रहा है AI?

सौ सालों से भी अधिक समय से दुनिया भर के वैज्ञानिक सूर्य के उस खतरनाक और रहस्यमयी चुंबकीय चक्र को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जो रह-रहकर सौर लपटें, विनाशकारी ज्वालाएं और कॉरोनल मास इजेक्शन (CME) पैदा करता है।

  • आसमान से मंडराता खतरा: सूर्य से उठने वाले ये चुंबकीय तूफान अगर पृथ्वी से टकरा जाएं, तो अंतरिक्ष में तैर रहे हमारे उपग्रह (Satellites), ग्लोबल नैविगेशन सिस्टम और जमीन पर पूरी बिजली आपूर्ति (Power Grids) को पल भर में ठप कर सकते हैं।

  • सस्पेंस की वजह: आधुनिक सैटेलाइट्स से पहले का सौर इतिहास वैज्ञानिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली था। अलग-अलग चित्रकारों की शैली, कागज की ढलती उम्र और स्कैनिंग की खराब क्वालिटी के कारण 100 साल पुराना डेटा पूरी तरह अव्यवस्थित था। लेकिन इस रिसर्च में यू-नेट (U-Net) नामक सुपर-एडवांस्ड एआई मॉडल ने वो कर दिखाया जो इंसान कभी नहीं कर सकते थे।

 'U-Net' का डिजिटल जाल: एआई ने कैसे पकड़े सूर्य के 'फिंगरप्रिंट्स'?

एस्ट्रोफिजिकल जर्नल (The Astrophysical Journal) में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक, एआई मॉडल ने दो बेहद संवेदनशील और जासूसी चरणों में काम किया:

  1. सूर्य की डिस्क की स्वचालित खोज: एआई ने सबसे पहले हर धुंधले और पुराने चित्र में सूर्य की डिस्क को खोजा, उसके केंद्र, सटीक आकार और झुकाव को मापा ताकि कोई भी जानकारी गलत जगह दर्ज न हो।

  2. प्लेजेस (Plages) की घेराबंदी: इसके बाद एआई ने 9 सौर चक्रों के इतिहास में जाकर 'प्लेजेस' (सूर्य पर मौजूद चुंबकीय रूप से सक्रिय चमकीले क्षेत्र) की पहचान की। ये प्लेज दरअसल सूर्य के चुंबकत्व का असली "फिंगरप्रिंट" हैं।

इस एआई जासूसी के बाद वैज्ञानिकों के हाथ लगा सूर्य की सक्रियता का एक अद्भुत 'तितली आरेख' (Butterfly Diagram), जिसने 1916 से 2007 के बीच अक्षांश और सौर-चक्र के चरणों के साथ बदलते सूर्य के आक्रामक व्यवहार को पूरी तरह डिकोड कर दिया।

 तिरुवनंतपुरम से अमेरिका तक फैला कूटनीतिक विज्ञान का जाल

इस महा-रिसर्च को अंजाम देने के लिए भारत और अमेरिका के शीर्ष संस्थानों ने हाथ मिलाया था। इसमें तिरुवनंतपुरम स्थित भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, अमेरिका (बोल्डर) का दक्षिणपश्चिम अनुसंधान संस्थान और बेंगलुरु का भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) शामिल थे।

डेटा का 'जादुई' मिलान:

जब एआई द्वारा हाथ से बने चित्रों से निकाले गए डेटा का मिलान कोडाइकनाल के अत्याधुनिक Ca II K पूर्ण-डिस्क प्रेक्षणों से किया गया, तो दोनों के नतीजे बिल्कुल सटीक बैठे। इसका मतलब यह है कि अब वैज्ञानिक अतीत के डेटा के खाली अंतरालों (Gaps) को भरकर भविष्य में आने वाले विनाशकारी सौर तूफानों की सटीक भविष्यवाणी कर सकेंगे।

 सौर महा-अध्ययन के मुख्य बिंदु
पैरामीटरविवरण / खोज
अध्ययन की अवधि1916 से 2007 (लगभग 9 सौर चक्र)
मुख्य तकनीकसुपरवाइज्ड मशीन लर्निंग पद्धति (U-Net Architecture)
प्रमुख खोजप्लेज क्षेत्र का समय-अक्षांश "बटरफ्लाई" मानचित्र
वैश्विक सहयोगभारत (ARIES, IIA, IIST) एवं अमेरिका (Southwest Research Institute)
प्रकाशन सोर्सhttps://doi.org/10.3847/1538-4365/ae381e

लेटेस्ट न्यूज़

उत्तराखंड की देशी 'बद्री' नस्ल के संरक्षण में ऐतिहासिक उपलब्धि: ओपीयू-आईवीएफ तकनीक से साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म

12-09-2026

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: वैश्विक शासन में सुधार के लिए दिया 'ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप' का 10 सूत्रीय प्रस्ताव

12-09-2026

ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान ने राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मु से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय शांति पर हुई विस्तृत चर्चा

12-09-2026

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत-यूएई संबंधों को नई धार: पीएम मोदी और आबू धाबी के क्राउन प्रिंस की उच्च स्तरीय बैठक

12-09-2026

विशाखापत्तनम में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव टेबल टॉप एक्सरसाइज संपन्न: गैर-कानूनी समुद्री गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए एकजुट हुए सदस्य देश

12-09-2026

उत्तराखंड की प्रसिद्ध देसी नस्ल 'बद्री गाय' के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है।

12-09-2026

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली के बीच द्विपक्षीय बैठक, ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर जोर

12-09-2026

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की द्विपक्षीय बैठक, कई अहम मुद्दों पर बनी सहमति

12-09-2026
होम ताजा खबरें वीडियो लाइव टीवी सर्च
LIVE
मेनू
​परिवहन न्यूज़
व्यापार
​लाइफस्टाइल & ज्ञान
विशेष कवरेज
मनोरंजन
अपराध
स्वास्थ्य समाचार
​देश-दुनिया