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क्या 1 जुलाई को ठप होगी राजधानी? 36 हजार रोजगार सेवकों का 'आर-पार' का ऐलान, सरकार की बढ़ी टेंशन!

उत्तर प्रदेश के 36,000 ग्राम रोजगार सेवकों ने 17 वर्षों के संविदा काल के बाद अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राज्य कर्मचारी का दर्जा, 24 हजार रुपये मासिक मानदेय और नियमितीकरण की मांग को लेकर सीएम को ज्ञापन सौंपा गया है। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 1 जुलाई 2026 को लखनऊ में विधानसभा घेराव समेत बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।

17-06-2026 11:12:14 8 Views

क्या 1 जुलाई को ठप होगी राजधानी? 36 हजार रोजगार सेवकों का 'आर-पार' का ऐलान, सरकार की बढ़ी टेंशन!

लखनऊ/आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के लाखों ग्रामीण क्षेत्रों की धुरी संभालने वाले ग्राम रोजगार सेवक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। 17 वर्षों से अपनी सेवाओं के बदले उचित सम्मान और अधिकार की बाट जोह रहे इन 36 हजार संविदा कर्मियों ने अब सीधे मुख्यमंत्री को अल्टीमेटम दे दिया है। यदि समय रहते उनकी सुध नहीं ली गई, तो 1 जुलाई को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नजारा पूरी तरह बदला हुआ नजर आ सकता है।

क्या है मुख्य मांगें?

प्रदेश के ग्राम रोजगार सेवकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जो उनके भविष्य और परिवार की सुरक्षा से जुड़ी हैं:

  • नियमितीकरण का सपना: 2006 से मनरेगा में कार्यरत रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

  • पद का सम्मान: इन्हें 'सहायक सचिव' अथवा 'ग्राम विकास सहायक' के पद पर समायोजित किया जाए।

  • बेहतर आर्थिक सुरक्षा: वर्तमान में मिल रहे 10 हजार रुपये के मामूली मानदेय को बढ़ाकर न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक किया जाए। साथ ही, बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान हो।

  • व्यापक अधिकार: जॉब चार्ट में अन्य विभागीय कार्यों को जोड़ा जाए और ईपीएफ, स्वास्थ्य बीमा, आकस्मिक अवकाश जैसी सुविधाएं दी जाएं।

सरकार को दिया सीधा अल्टीमेटम

ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के ग्राम रोजगार सेवक 1 जुलाई 2026 को लखनऊ की सड़कों पर उतरेंगे। विरोध प्रदर्शन का केंद्र विधानसभा के साथ-साथ जवाहर भवन, भाजपा कार्यालय, इंदिरा भवन, चारबाग रेलवे स्टेशन और राजभवन गेट जैसे प्रमुख स्थान होंगे।

संविदा के 'जंजाल' से कब मिलेगी मुक्ति?

आक्रोशित रोजगार सेवकों का कहना है कि अन्य राज्यों में समान पदों पर कार्यरत कर्मियों को समूह 'ग' के बराबर वेतन और सुविधाएं मिल रही हैं, लेकिन यूपी में वे 17 वर्षों से संविदा के जंजाल में फंसे हुए हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस बड़े वर्ग के धैर्य के इम्तिहान में पास होती है या 1 जुलाई को लखनऊ में बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा।

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क्या 1 जुलाई को ठप होगी राजधानी? 36 हजार रोजगार सेवकों का 'आर-पार' का ऐलान, सरकार की बढ़ी टेंशन!

उत्तर प्रदेश के 36,000 ग्राम रोजगार सेवकों ने 17 वर्षों के संविदा काल के बाद अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। राज्य कर्मचारी का दर्जा, 24 हजार रुपये मासिक मानदेय और नियमितीकरण की मांग को लेकर सीएम को ज्ञापन सौंपा गया है। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 1 जुलाई 2026 को लखनऊ में विधानसभा घेराव समेत बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।

17-06-2026 8 Views
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क्या 1 जुलाई को ठप होगी राजधानी? 36 हजार रोजगार सेवकों का 'आर-पार' का ऐलान, सरकार की बढ़ी टेंशन!

लखनऊ/आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के लाखों ग्रामीण क्षेत्रों की धुरी संभालने वाले ग्राम रोजगार सेवक अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। 17 वर्षों से अपनी सेवाओं के बदले उचित सम्मान और अधिकार की बाट जोह रहे इन 36 हजार संविदा कर्मियों ने अब सीधे मुख्यमंत्री को अल्टीमेटम दे दिया है। यदि समय रहते उनकी सुध नहीं ली गई, तो 1 जुलाई को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का नजारा पूरी तरह बदला हुआ नजर आ सकता है।

क्या है मुख्य मांगें?

प्रदेश के ग्राम रोजगार सेवकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जो उनके भविष्य और परिवार की सुरक्षा से जुड़ी हैं:

  • नियमितीकरण का सपना: 2006 से मनरेगा में कार्यरत रोजगार सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

  • पद का सम्मान: इन्हें 'सहायक सचिव' अथवा 'ग्राम विकास सहायक' के पद पर समायोजित किया जाए।

  • बेहतर आर्थिक सुरक्षा: वर्तमान में मिल रहे 10 हजार रुपये के मामूली मानदेय को बढ़ाकर न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक किया जाए। साथ ही, बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान हो।

  • व्यापक अधिकार: जॉब चार्ट में अन्य विभागीय कार्यों को जोड़ा जाए और ईपीएफ, स्वास्थ्य बीमा, आकस्मिक अवकाश जैसी सुविधाएं दी जाएं।

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