हिंद महासागर में भारतीय नौसेना का बड़ा ऑपरेशन: सोमालिया तट के पास अपहृत जहाज ‘अजिनी’ मुक्त, 20 क्रू मेंबर सुरक्षित बचाए गए
SJM 24 न्यूज़ डेस्क:
भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी उच्च परिचालन क्षमता और त्वरित कार्रवाई का एक और शानदार उदाहरण पेश किया है। सोमालिया के उत्तर-पूर्वी तट के पास सशस्त्र समुद्री लुटेरों द्वारा अपहृत किए गए मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ (Ajini) को नौसेना ने 48 घंटे से अधिक चले एक कठिन और सुव्यवस्थित अभियान के बाद सफलतापूर्वक मुक्त करा लिया है। इस सफल ऑपरेशन में जहाज पर मौजूद सभी 20 चालक दल (क्रू मेंबर्स) को सुरक्षित बचा लिया गया है। राहत की बात यह है कि कार्रवाई के दौरान किसी भी नाविक के हताहत या घायल होने की खबर नहीं है।
'मदर शिप' बनने से रोका, टला बड़ा समुद्री खतरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, मछली पकड़ने वाले इस जहाज अजिनी को पिछले महीने की शुरुआत में सोमालिया के तट के पास सशस्त्र लुटेरों ने अपने कब्जे में ले लिया था। आशंका जताई जा रही थी कि समुद्री लुटेरे इस अपहृत जहाज का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले करने के लिए 'मदर शिप' (मुख्य जहाज) के रूप में करने की योजना बना रहे थे। इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और सुरक्षा के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था।
वायुसेना और मरीन कमांडोज (MARCOS) का सटीक तालमेल
खतरे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने तुरंत अपने एक अग्रिम युद्धपोत को इलाके में रवाना किया। इस ऑपरेशन में नौसेना के समुद्री निगरानी विमान (Maritime Surveillance Aircraft) की भी मदद ली गई, जिसने लगातार जहाज की लोकेशन पर नजर बनाए रखी।
ऑपरेशन को निर्णायक मोड़ देने के लिए भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान की मदद से नौसेना के विशेष मरीन कमांडोज (MARCOS) को सटीक एयरड्रॉप तकनीक से समुद्र में तैनात किया गया।
गैर-घातक रणनीतिक कार्रवाई से मिली सफलता
नौसेना और वायुसेना के आपसी तालमेल से लुटेरों के जहाज को घेर लिया गया और उसकी गतिविधियों को सीमित कर दिया गया। नौसेना ने सुनियोजित गैर-घातक उपायों का इस्तेमाल करते हुए जहाजों और नाविकों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए पूरे जहाज पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। मरीन कमांडोज की मौजूदगी और दबाव के कारण समुद्री लुटेरों का खतरा पूरी तरह निष्प्रभावी हो गया, जिससे 20 नाविकों की सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी।
हिंद महासागर में 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' के रूप में उभरा भारत
भारतीय नौसेना का यह सफल अभियान उसकी उच्च परिचालन तत्परता, अंतर-सेवा समन्वय और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है। यह ऑपरेशन एक बार फिर साबित करता है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' (First Responder) और एक भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी भूमिका पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा है।
भारतीय नौसेना ने दोहराया है कि वह समुद्री नाविकों की सुरक्षा, महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों की रक्षा और संपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र में एक सुरक्षित, संरक्षित और स्थिर माहौल बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।