दवाओं, मेडिकल उपकरणों और कॉस्मेटिक्स के आयात का दायरा बढ़ाएगी सरकार: स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में संशोधन का रखा प्रस्ताव
SJM 24 न्यूज़ डेस्क:
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश में दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और सौंदर्य प्रसाधनों (कॉस्मेटिक्स) के आयात को और अधिक आसान व सुगम बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' के नियम 43ए में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत देश में अधिकृत आयात गेटवे (Import Gateways) के नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा उत्पादों की लॉजिस्टिक्स कार्यक्षमता में सुधार करना, देश के भीतर परिवहन लागत को घटाना और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करना है, ताकि देश के हर हिस्से में आवश्यक दवाएं और चिकित्सा उपकरण समय पर उपलब्ध हो सकें।
नियम 43ए में क्या होगा बदलाव?
'ड्रग्स रूल्स, 1945' का नियम 43ए उन विशिष्ट बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों और सड़क मार्गों को अधिसूचित करता है जिनके माध्यम से भारत में विदेश से दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों का कानूनी रूप से आयात किया जा सकता है। नए प्रस्ताव के तहत अधिकृत स्थानों की सूची में कई नए इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD), एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को शामिल करने की योजना है।
इन नए शहरों और डिपो को सूची में जोड़ने का प्रस्ताव
प्रस्तावित संशोधन के तहत निम्नलिखित नए स्थानों को अधिकृत आयात गेटवे के रूप में जोड़ा जाएगा:
उत्तर प्रदेश: नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (हवाई मार्ग से आयात के लिए) और आईसीडी दादरी।
हरियाणा: आईसीडी सोनीपत, आईसीडी पियाला और आईसीडी हरसारू।
गुजरात: आईसीडी गांधीधाम/मुंद्रा।
तेलंगाना (हैदराबाद): आईसीडी सनत नगर और आईसीडी थिम्मापुर।
कर्नाटक (बेंगलुरु): आईसीडी व्हाइटफील्ड और एसईजैड (SEZ) बोम्मासांद्रा।
ये नए केंद्र मध्य प्रदेश के धननाद और तिही (इंदौर) स्थित आईसीडी जैसे पहले से मौजूद अधिकृत आयात नेटवर्क का हिस्सा बनेंगे।
आयातकों और आम जनता को क्या होगा फायदा?
लॉजिस्टिक्स लागत और समय में कमी: आयातक अब अपने विनिर्माण संयंत्रों, गोदामों और वितरण केंद्रों के नजदीकी डिपो से ही सामान प्राप्त कर सकेंगे। इससे देश के भीतर अनावश्यक परिवहन की दूरी और लागत दोनों में कमी आएगी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: इस कदम से स्वास्थ्य क्षेत्र में 'व्यापार करने में आसानी' (Ease of Doing Business) को बढ़ावा मिलेगा और आयातित सामान की आवाजाही में होने वाली प्रशासनिक या ढांचागत देरी खत्म होगी।
सप्लाई चेन होगी मजबूत: देश के हर कोने में जीवनरक्षक दवाओं और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की सुगम और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
सरकार ने मांगे सुझाव व आपत्तियां
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस प्रस्तावित संशोधन पर आम जनता, उद्योग जगत और हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इच्छुक व्यक्ति अपने सुझाव डाक द्वारा "अवर सचिव (दवा नियमन), यू-6, वर्क हॉल, सी विंग, पहली मंजिल, कर्तव्य भवन-1, नई दिल्ली– 110001" पर भेज सकते हैं या ईमेल के जरिए drugsdiv-mohfw@gov.in पर प्रेषित कर सकते हैं।