कोयला क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर भारत' को बड़ा बढ़ावा: अक्टूबर 2026 में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से उत्पादन 42% और प्रेषण 36% बढ़ा
नई दिल्ली / एसजेएम 24 न्यूज डेस्क:
देश को ऊर्जा और औद्योगिक कच्चे माल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत सरकार के कोयला मंत्रालय को बड़ी सफलता मिली है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अक्टूबर माह में देश की कैप्टिव और वाणिज्यिक (Captive & Commercial) कोयला खदानों के उत्पादन और प्रेषण (Despatch) दोनों में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है।
कोयला मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में कोयला उत्पादन में सालाना आधार पर 42 प्रतिशत और कोयले के प्रेषण में 36 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अक्टूबर 2026: उत्पादन और प्रेषण के आंकड़े
कोयला उत्पादन (Production): अक्टूबर 2026 में कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से कुल कोयला उत्पादन बढ़कर 22.03 मिलियन टन (MT) तक पहुँच गया। वहीं, पिछले वर्ष समान अवधि (अक्टूबर 2025) में यह आंकड़ा 15.49 मिलियन टन था। इस प्रकार उत्पादन में लगभग 42.22% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।
कोयला प्रेषण (Despatch): अक्टूबर 2026 के दौरान कोयले का प्रेषण बढ़कर 21.11 मिलियन टन (MT) हो गया, जो अक्टूबर 2025 के 15.48 मिलियन टन की तुलना में 36.37% अधिक है।
चालू वित्त वर्ष (अप्रैल से अक्टूबर 2026) का समग्र प्रदर्शन
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती सात महीनों (अप्रैल से अक्टूबर) में भी खनन क्षेत्र की निरंतर प्रगति देखने को मिली है:
उत्पादन में वृद्धि: अप्रैल-अक्टूबर 2026 की अवधि में कुल कोयला उत्पादन 117.23 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि (105.33 MT) की तुलना में 11.30 प्रतिशत अधिक है।
प्रेषण में वृद्धि: इस अवधि के दौरान कोयले का प्रेषण 124.86 मिलियन टन तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष (111.95 MT) की तुलना में 11.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
झारखंड की लोहारी कोयला खदान को मंजूरी, कुल चालू खदानें हुई 87
कोयला क्षेत्र को एक और बड़ा संबल प्रदान करते हुए, मंत्रालय ने लंबे समय से प्रतीक्षित झारखंड स्थित लोहारी कोयला खदान (Lohari Coal Mine) को खदान खोलने की अनुमति (Mine Opening Permission) प्रदान कर दी है।
कई वर्षों से परिचालन की प्रतीक्षा कर रही इस खदान को मिली स्वीकृति सरकार द्वारा लागू किए गए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' (Ease of Doing Business) सुधारों का सीधा परिणाम है। लोहारी खदान के जुड़ने के साथ ही देश में परिचालनरत (Operational) कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों की कुल संख्या बढ़कर 87 हो गई है।
अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर सकारात्मक प्रभाव
कोयला मंत्रालय के अनुसार, कैप्टिव और कमर्शियल माइनिंग में आई यह तेजी देश की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगी:
आयात पर निर्भरता में कमी: घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ने से विदेश से मंगाए जाने वाले कोयले पर निर्भरता कम होगी।
विदेशी मुद्रा की बचत: स्थानीय स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित होने से देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचेगी।
सप्लाई चेन की मजबूती: बिजली संयंत्रों और भारी उद्योगों को निर्बाध कोयला आपूर्ति मिलने से औद्योगिक उत्पादन को गति मिलेगी।
ऊर्जा सुरक्षा: भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विश्वसनीय और सतत आपूर्ति तंत्र तैयार होगा।
मंत्रालय का संकल्प और भावी रणनीति
कोयला मंत्रालय ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि सरकार कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों की पूर्ण क्षमता का उपयोग करने के लिए निरंतर काम कर रही है। भविष्य में आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करने, नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और प्रगतिशील नीतिगत बदलावों के जरिए उत्पादन की इस तेज गति को बनाए रखा जाएगा, ताकि 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना साकार हो सके।